पश्चिम बंगाल में दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव से ममता बनर्जी की पार्टी पूरी तरह से बाहर हो चुकी है। नंदीग्राम के बाद रेजीनगर सीट से कैंडिडेट ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया है। ममता बनर्जी गुट के रबीउल आलम चौधरी ने अब पार्टी छोड़ने का भी ऐलान कर दिया है। वह आज ही दोपहर तीन बजे पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ममता का साथ छोड़ने के बाद वह किस पार्टी में जाएंगे।आपको बता दें कि इससे एक दिन पहले नंदीग्राम विधानसभा सीट के लिए ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने भी उपचुनाव की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया था। उन्होंने कहा कि नामांकन वापस लेने का फैसला उन्होंने खुद ममता बनर्जी से बातचीत के बाद लिया है।नंदीग्राम सीट ममता के लिए कितना महत्वपूर्ण?नंदीग्राम की घोषणा ममता बनर्जी के लिए खास राजनीतिक महत्व रखती है। 2007 में इस क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन उनके राजनीतिक सफर की अहम लड़ाइयों में से एक बन गया था और इसने वाम मोर्चा के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस के अभियान को आगे बढ़ाने में मदद की। इसके बाद 2011 में पार्टी पश्चिम बंगाल में सत्ता में आयी। तृणमूल ने 2011 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के साथ गठबंधन में लड़ा था और राज्य में वाम मोर्चा के 34 साल के शासन को खत्म किया था। ममता ने 15 साल बाद नंदीग्राम में फिर से कांग्रेस को समर्थन दिया है। लेकिन इस बार विपक्ष की स्थिति बदली हुई है।आपको बता दें कि नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान छह अक्टूबर को होगा जबकि मतगणना नौ अक्टूबर को होगी। रेजीनगर सीट तब खाली हुई, जब आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) प्रमुख हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नौदा दोनों सीट से जीत दर्ज करने के बाद रेजीनगर सीट छोड़ दी।