घर का मुख्य द्वार आपके घर के सम्पूर्ण वास्तु पर लगभग 35 प्रतिशत प्रभाव डालता है. इसलिए घर का वास्तु देखते समय सबसे पहले मुख्य द्वार को ही देखना चाहिए. घर का मुख्य द्वार सकारात्मक दिशा में हो तो घर के अन्दर अन्य वास्तु दोष को ठीक कर बहुत हद तक पंच तत्वों को संतुलित रखा जा सकता है. साउथ-वेस्ट और नॉर्थ-ईस्ट को छोड़कर अन्य दिशाओं में मुख्य द्वार होने पर उपाय किए जा सकते हैं. लेकिन साउथ-वेस्ट के मुख्य द्वार का उसे हटाने के अलावा और कोई उपाय नहीं है. और पढ़ेंसबसे अधिक खतरनाक साउथ-वेस्ट दिशा का ही मुख्य द्वार होता है, जो व्यक्ति को जीवन में मृत्यु तुल्य कष्ट देता है. इसलिए गलती से भी साउथ-वेस्ट दिशा में मुख्य द्वार न बनाएं.मुख्य द्वार घर में प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है. इसलिए इसकी दिशा का घर के वास्तु में विशेष महत्व माना जाता है. मुख्य द्वार किस दिशा में है, इसके आधार पर घर में रहने वाले लोगों के जीवन पर अलग-अलग प्रकार के प्रभाव देखने को मिल सकते हैं. कुछ दिशाओं में मुख्य द्वार होने पर उपाय किए जा सकते हैं. जबकि कुछ दिशाओं को अधिक नकारात्मक माना जाता है.किन दिशाओं में नकारात्मक होता है मुख्य द्वार?मुख्य द्वार के लिए सबसे अधिक नकारात्मक दिशा साउथ-वेस्ट और साउथ ईस्ट होती है, जो जीवन में बार-बार परेशानियां खड़ी कर सकती हैं. ऐसा होने पर अप्रत्याशित दुर्घटना या आर्थिक परेशानी का सामना लोगों को करना पड़ सकता है. नॉर्थ ईस्ट का मुख्य द्वार भी आर्थिक परेशानी के साथ अग्नि से सम्बंधित परेशानियां देता है. व्यक्ति गलत निर्णयों के कारण पैसे को नुकसान करता है. Advertisement वहीं नॉर्थ-वेस्ट के मुख्य द्वार से जीवन में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ जाती है, जो सामने आपके मित्र और पीछे दुश्मन की तरह व्यवहार करते हैं. जीवन में विरोधियों की संख्या बढ़ने के साथ सहयोग करने वालों की संख्या कम हो सकती है.इसलिए घर बनाते समय मुख्य द्वार की दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए. केवल घर की सुंदरता या सुविधा को देखकर मुख्य द्वार का स्थान तय नहीं करना चाहिए. वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार की दिशा का चयन करना घर के सम्पूर्ण वास्तु के लिए महत्वपूर्ण है.---- समाप्त ---- ये भी देखें