Iran-US War Update: ईरान ने अमेरिका के साथ जारी युद्ध को खत्म करने और बातचीत को दोबारा शुरू करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अपनी तीन प्रमुख शर्तें सामने रखी हैं। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई के मुताबिक, ये शर्तें कतर के मध्यस्थों के जरिए अमेरिकी प्रशासन तक पहुंचाई जा चुकी हैं। अब तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है। ईरान ने बातचीत का संदेश ऐसे समय दिया है जब अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के कॉन्सुलर अफेयर्स ने मिडिल ईस्ट के लिए एक डिटेल्स सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है। इसमें इस एरिया में मौजूद अमेरिकी नागरिकों से कहा गया है कि वे सुरक्षा की जटिल स्थितियों और अचानक तनाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए ज्यादा सतर्क रहें।ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने 'अल जजीरा' को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'कतर ने तेहरान की शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी है।' उन्होंने बताया कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए कतर और पाकिस्तान के साथ संपर्क जारी है। रेजाई के अनुसार, ईरान अब सीधे तौर पर ट्रंप के जवाब की प्रतीक्षा कर रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच महीनों से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए मध्यस्थ देशों की कोशिशें चल रही हैं।ईरान की 3 प्रमुख शर्तें क्या हैं?1. सभी मोर्चों पर युद्ध पूरी तरह खत्म हो तेहरान की अमेरिका से पहली मांग है कि अमेरिका के साथ युद्ध को सभी सक्रिय मोर्चों पर समाप्त किया जाए। ईरान क्षेत्रीय स्तर पर जारी संबंधित संघर्षों को भी व्यापक युद्धविराम के दायरे में लाने की बात कर चुका है।2. अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म हो अमेरिका के सामने दूसरी बड़ी शर्त ईरान के बंदरगाहों और समुद्री व्यापार पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की है। ईरान का कहना है कि युद्ध समाप्ति की प्रक्रिया में समुद्री आवाजाही पर लगी पाबंदियां भी हटनी चाहिए।3. ईरान की जमी हुई संपत्तियां और फंड जारी किए जाएं तीसरी मांग विदेशों में फंसे या प्रतिबंधों के कारण फ्रीज किए गए ईरानी सरकारी फंड और वित्तीय संपत्तियों को रिलीज करने की है। ईरान इस शर्त को बातचीत आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण शर्त मान रहा है।ईरान का सख्त संदेश- दबाव से नहीं झुकेंगे रेजाई ने कहा कि अमेरिकी धमकियों से ईरान अपनी स्थिति नहीं बदलेगा। उन्होंने दावा किया कि इन शर्तों को स्वीकार करना अमेरिका के हित में भी होगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो ईरान लंबे संघर्ष के लिए तैयार है।कतर और पाकिस्तान निभा रहे हैं मध्यस्थ की भूमिका अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद के बजाय कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ चैनल के तौर पर एक्टिव हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल कराने की कोशिशें पहले हुए समझौते/MoU के समाप्त होने के बाद भी जारी हैं। ईरान पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि अमेरिकी नाकाबंदी हटाना और जमे हुए ईरानी फंड जारी करना आगे की बातचीत तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी व्यवस्था के लिए अहम मुद्दे हैं।अब ट्रंप के जवाब पर टिकी नजरेंअब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका तेहरान की इन शर्तों पर क्या प्रतिक्रिया देता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में युद्ध को समाप्त करने की संभावना को लेकर संकेत दिए हैं। लेकिन बातचीत की शर्तों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों पक्षों के बीच गंभीर मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में ईरान की ओर से रखी गई शर्तें आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। यदि दोनों पक्ष किसी साझा आधार पर पहुंचते हैं तो बातचीत का रास्ता खुल सकता है; वहीं असहमति बनी रहने पर सैन्य तनाव जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।अमेरिकी ने जारी की एडवाइजरीइस बीच, U.S. डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के कॉन्सुलर अफेयर्स ने मिडिल ईस्ट के लिए एक विस्तृत सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। इसमें इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों से कहा गया है कि वे सुरक्षा की जटिल स्थितियों और अचानक तनाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए ज्यादा सतर्क रहें।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने एक पोस्ट में U.S. डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के कॉन्सुलर अफेयर्स ने लिखा, 'मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकियों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए और संभावित फ्लाइट कैंसिलेशन, एयरस्पेस बंद होने और यात्रा में रुकावटों के बारे में जानकारी रखनी चाहिए। ईरान समर्थित हूथी गुटों ने सऊदी अरब के खिलाफ हमले किए हैं, जिनमें आम नागरिकों के एयरपोर्ट भी शामिल हैं। इस सैन्य टकराव के तेज़ी से बढ़ने की आशंका है। जो अमेरिकी मिडिल ईस्ट से बाहर हैं, उन्हें इस क्षेत्र की यात्रा करने या यहां से गुजरने के बारे में गंभीरता से दोबारा सोचना चाहिए।'ये भी पढ़ें- Trump ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाले बिल पर हस्ताक्षर किया, जानिए अब आगे क्या होगाएडवाइजरी में आगे कहा गया है, 'जो लोग इस क्षेत्र की यात्रा करते हैं या यहां से आते-जाते हैं, उन्हें एयरपोर्ट और एयरलाइन के कामकाज के बारे में जानकारी पर नज़र रखनी चाहिए। मिडिल ईस्ट के बाहर भी अमेरिकी राजनयिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। ईरान और ईरान का समर्थन करने वाले समूह विदेशों में या दुनिया भर में अमेरिका और अमेरिकियों से जुड़ी जगहों पर अमेरिकी हितों को निशाना बना सकते हैं, जिनमें अमेरिकी व्यवसाय और अन्य संस्थान शामिल हैं।'