Surya Chalisa Paath: रविवार का दिन भगवान सूर्य देव को समर्पित माना जाता है. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव को ग्रहों का राजा कहा जाता है. सूर्य आत्मविश्वास, मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता और सफलता के कारक माने जाते हैं. यही वजह है कि रविवार के दिन सूर्य देव की उपासना करना विशेष फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति को अपने कार्यों में सफलता पाने का आशीर्वाद मिलता है.रविवार को सूर्य चालीसा का पाठअगर आप करियर में तरक्की, कारोबार में सफलता और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना रखते हैं, तो रविवार के दिन सूर्य चालीसा का पाठ कर सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव की उपासना और सूर्य चालीसा का पाठ करने से भगवान सूर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. नियमित रूप से श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ करने से मन को शांति मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिल सकती है.सूर्य चालीसा का पाठ करने के लाभधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार के दिन सूर्य चालीसा का पाठ करने से कई तरह के लाभ प्राप्त हो सकते हैं- करियर में तरक्की:- सूर्य देव को नेतृत्व और मान-सम्मान का कारक माना जाता है. उनकी उपासना से कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है. कारोबार में लाभ:- सूर्य चालीसा का पाठ कारोबार में उन्नति और आर्थिक समृद्धि की धार्मिक कामना से किया जाता है. मान-सम्मान में वृद्धि:- सूर्य देव की कृपा से समाज में प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास बढ़ने की मान्यता है. नकारात्मकता से मुक्ति:- सूर्य उपासना को जीवन के अंधकार और परेशानियों को दूर करने वाला माना जाता है. स्वास्थ्य लाभ:- धार्मिक मान्यताओं में सूर्य देव की पूजा को अच्छे स्वास्थ्य और ऊर्जा से जोड़ा जाता है.श्री सूर्य चालीसा (Surya Chalisa)दोहाकनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।चौपाईजय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।दोहाभानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।सूर्य चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?सूर्य चालीसा का पाठ सूर्योदय के समय करना शुभ माना जाता है. विशेष रूप से रविवार के दिन सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव की पूजा और चालीसा का पाठ कर सकते हैं.सूर्य चालीसा पाठ करने की विधि और नियमरविवार के दिन सूर्य देव की पूजा करते समय कुछ सामान्य धार्मिक नियमों का पालन कर सकते हैं. इससे पूजा विधि-विधान और श्रद्धा के साथ करने में मदद मिलती है.सुबह स्नान करें:- सुबह उठकर स्नान करें और साफ लाल या हल्के रंग के वस्त्र पहनें.सूर्य देव को अर्घ्य दें:- तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें और पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को जल अर्पित करें.सूर्य चालीसा का पाठ करें:- अर्घ्य देने के बाद शांत मन से सूर्य देव का ध्यान करें और सूर्य चालीसा का पाठ करें.Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.