हल्दिया सब-डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले गिरफ्तार किए गए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 14 दिन की जेल कस्टडी का आदेश दिया है. शुक्रवार को पुलिस ने मिलन प्रधान को हत्या और हत्या की कोशिश समेत चार पुराने मामलों में गिरफ्तार किया था. इस गिरफ्तारी के बाद बंगाल की सियासत गरमा गयी थी. कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी द्वारा समर्थन देने के बाद यह गिरफ्तारी हुई है और यह पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध का मामला है.शनिवार को कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान गिरफ्तार कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने दावा किया कि टीएमसी डरी हुई है. पार्टी उम्मीदवार की गिरफ्तारी के विरोध में शनिवार को हल्दिया सब-डिस्ट्रिक्ट कोर्ट परिसर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी प्रदर्शन किया.क्या अब चुनाव लड़ पाएंगे प्रधान?अब यह सवाल है कि कांग्रेस उम्मीदवार को जमानत नहीं मिली है तो क्या उन्हें चुनाव लड़ने में दिक्कत होगी? नियमों के मुताबिक, अगर उन्हें दो साल से कम की सजा होती है, तो इलेक्शन कमीशन को इस मामले में कोई रुकावट नहीं होगी. इस गिरफ्तारी से स्क्रूटनी में कोई रुकावट नहीं आएगी. अगर वह जेल में भी हैं, तो कांग्रेस के दूसरे नेता जेल के बाहर कांग्रेस उम्मीदवार के लिए प्रचार कर सकेंगे. चुनाव प्रचार के लिए, उम्मीदवार का जेल के अंदर से रिकॉर्ड किया गया भाषण भी जनसभा में माइक्रोफोन पर प्रसारित किया जा सकेगा. इससे पहले भी कई नेता जेल से चुनाव लड़ चुके हैं. इनमें अधीर रंजन चौधरी से लेकर मदन मित्रा जैसे नेताओं का नाम शामिल है.कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर बोला हमलाप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने आरोप लगाया, "एक उपचुनाव में राज्य में सत्ता नहीं बदलेगी. इतने बड़े जनसमर्थन के साथ सत्ता में आने के बाद भी ये सब करने की कोई ज़रूरत नहीं थी. मिलन प्रधान भाग नहीं रहे थे. पुलिस उन्हें बुलाकर बात कर सकती थी. लोग सब कुछ देख रहे हैं.कांग्रेस के प्रवक्ता और वकील अजितेश पांडे ने कहा, "हमने जमानत के लिए आवेदन किया था. हमने सवाल उठाया था कि नामांकन के ठीक बाद उन्हें बहुत पुराने अरेस्ट वारंट के आधार पर क्यों अरेस्ट किया गया, लेकिन कोर्ट ने 14 दिन की जेल कस्टडी का आदेश दिया. हमने कहा कि यह अरेस्ट गैर-कानूनी है." उन्होंने कहा कि इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस कोर्ट में अपील करेगी.जज ने सरकारी वकील से पूछा कि उन्हें इतने दिनों बाद क्यों अरेस्ट किया गया. उन्होंने कहा कि मिलन प्रधान इतने दिनों से मिल नहीं रहे थे. अब वह मिल गए हैं, इसीलिए उन्हें अरेस्ट किया गया है."ममता के समर्थन के बाद गिरफ्तारी पर उठे सवालबता दें कि ममता बनर्जी के कांग्रेस को समर्थन करने का ऐलान करते ही मिलन प्रधान को शुक्रवार शाम को 19 साल पुराने एक केस में अरेस्ट कर लिया गया. उन्हें 2007 के एक मर्डर केस में भी शाम करीब 6 बजे चांदीपुर के एक होटल से अरेस्ट किया गया था. इस घटना ने न सिर्फ राज्य में बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है.कांग्रेस की ऑल-इंडिया लीडरशिप और ममता बनर्जी ने भी इस केस को 'बदले की पॉलिटिक्स' और 'डेमोक्रेसी का मर्डर' बताया है. पुलिस पहले ही कह चुकी है कि मिलन 2007 से 'फरार' है. चार्जशीट में भी उसे फरार दिखाया गया है. उसके खिलाफ पहले भी कई बार अरेस्ट वारंट जारी हो चुके हैं, लेकिन वह गिरफ्तारी से बचता रहा है.पुलिस ने कहा कि उन्होंने यह रिपोर्ट समय पर संबंधित कोर्ट में जमा कर दी थी पुलिस ने कहा कि मिलन को उस ऑपरेशन के तहत गिरफ्तार किया गया जो पुलिस ने नंदीग्राम में उपचुनाव से पहले पुराने मामलों के आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए कमीशन के नियमों के अनुसार शुरू किया था. उन्होंने कहा कि इस गिरफ्तारी के पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं है. बल्कि, मिलन को कमीशन के नियमों के अनुसार कानूनी तौर पर गिरफ्तार किया गया था.ये भी पढ़ें- नंदीग्राम उपचुनाव: हत्या के पुराने मामले में कांग्रेस उम्मीदवार गिरफ्तार, कुछ देर पहले ममता ने किया था समर्थन का ऐलान