जम्मू के नरवाल, बठिंडी और सुंजवां में रोहिंग्या बस्तियों पर कार्रवाई के बाद प्रशासन के सामने यह नई चुनौती है ...और पढ़ें
जम्मू के सुंजवां-बठिंडी समेत कई इलाकों में तलाशे जा रहे नए ठिकाने। (फाइल फोटो)
नरवाल में रोहिंग्या बस्तियों पर कार्रवाई के बाद विस्थापन।
विस्थापित रोहिंग्या के नए ठिकानों की तलाश बड़ी चुनौती।
बिना सत्यापन शरण देने वालों पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी।
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू के नरवाल, बठिंडी और सुंजवां क्षेत्र में रोहिंग्या बस्तियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि यहां से निकाले गए रोहिंग्या नागरिक आखिर कहां जा रहे हैं? क्या वे जम्मू से बाहर निकल रहे हैं या फिर शहर और आसपास के इलाकों में छोटी-छोटी बस्तियों अथवा किराये के कमरों में बिखरकर दोबारा बसने की कोशिश कर रहे हैं? प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने यही नई चुनौती है।
नरवाल में कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में परिवारों के अपने सामान समेटकर निकलने की तस्वीरें सामने आई हैं, लेकिन उनके अगले ठिकाने को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
कुछ परिवार शहर के पुराने मोहल्लों और दूसरे इलाकों में किराये के कमरे तलाश रहे हैं। बठिंडी के ऊपरी जंगल में भी कुछ परिवारों के अस्थायी रूप से बसने की कोशिश करने की सूचना सामने आई थी, जिन्हें प्रशासन ने वहां से हटा दिया।
नरवाल में एक स्थान पर केंद्रित बस्ती होने के कारण वहां रहने वाले परिवारों की पहचान और निगरानी अपेक्षाकृत आसान थी। अब बस्ती खाली होने के बाद यदि ये परिवार अलग-अलग इलाकों में छोटे समूहों में चले जाते हैं तो उनकी पहचान, दस्तावेजों का सत्यापन और वास्तविक निवास स्थान की निगरानी सुरक्षा एजेंसियों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
यही वजह है कि प्रशासन और पुलिस का फोकस अब केवल खाली कराई गई बस्तियों तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि संभावित नए ठिकानों की पहचान और सत्यापन पर भी है। पुलिस ने मकान मालिकों को बिना सत्यापन विदेशी नागरिकों को किराये पर रखने को लेकर चेतावनी दी है।
नरवाल की कार्रवाई ने केवल बस्तियां खाली कराने का सवाल नहीं खड़ा किया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर विदेशी नागरिकों को जमीन अथवा रहने की जगह उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। जिला प्रशासन की कार्रवाई से जुड़े हालिया घटनाक्रम में जमीन मालिकों को नोटिस जारी किए जाने और अवैध रूप से बस्तियां बसाने के आरोपों की जांच की बात सामने आई है।
भलवाल में भी करीब 50 परिवारों के रहने और जमीन मालिकों द्वारा कथित रूप से उनसे जमीन, पानी और बिजली के बदले किराया लेने की रिपोर्ट सामने आई है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना अहम होगा कि कहीं एक क्षेत्र से हटाए जाने के बाद इन्हें दूसरे क्षेत्रों में बसाने के लिए कोई स्थानीय नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। हालांकि किसी संगठित षड्यंत्र की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विदेशी नागरिकों के आवास और उनकी जानकारी उपलब्ध कराने से संबंधित कानूनी प्रावधान अब फारेन एक्ट 2025 तथा इससे जुड़े नियमों के तहत लागू होते हैं। नए कानून में विदेशियों के भारत में प्रवेश, ठहरने, आवागमन और पहचान से संबंधित प्रावधान हैं।
केंद्र सरकार को विदेशियों की मौजूदगी और उनके ठहरने को विनियमित करने के लिए आदेश और निर्देश जारी करने की शक्ति भी दी गई है। इसलिए यदि किसी विदेशी नागरिक को नियमों का उल्लंघन करते हुए ठहराने या उसकी जानकारी छिपाने का मामला सामने आता है तो संबंधित व्यक्ति की भूमिका और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
सामान्य
नरवाल से हटाए गए रोहिंग्या कहां गए? जम्मू के इन इलाकों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर, मकान मालिकों को कड़ी चेतावनी - rohingya displacement security forces faces new resettlement challenge
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