नई दिल्लीः राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने शनिवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने जीवन का एक रोचक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि एक युवा अधिकारी के तौर पर अपनी पोस्टिंग के समय की यह कहानी है।चीन बॉर्डर पर तैनाती की कहानी बताईअजीत डोभाल ने कहा, ' मैं एक युवा IPS अधिकारी था, असल में इंटेलिजेंस के काम में नया था। मैं अपनी बीस की उम्र में था और सिक्किम में इंटेलिजेंस का इंचार्ज था। लेकिन मेरी जिम्मेदारी में बॉर्डर वाले इलाकों की देखभाल करना और PLA की हलचल, चीनी सेना की गतिविधियों, चीनी परंपराओं और इन सबके बारे में इंटेलिजेंस इकट्ठा करना भी शामिल था, जो मेरे काम और इंटेलिजेंस ब्रीफ का हिस्सा था।'जब इंटेलिजेंस मिशन को लेकर परेशान हो गए डोभालNSA ने बताया, 'हमने एक ऑपरेशन के लिए बॉर्डर वाले इलाके में एक इंटेलिजेंस मिशन भेजा था। उन्हें पांच या छह दिन बाद वापस आना था... पांच दिन बीत गए, वे लोग नहीं आए। दस दिन बीत गए। फिर दस दिन और बीत गए। मेरे लिए यह बहुत चिंता की बात थी, न सिर्फ पेशेवर तौर पर, बल्कि मानवीय नजरिए से भी... लेकिन मुझे हेडक्वार्टर से फोन आया। और मेरे बॉस ने मुझे बताया कि वे अब चीनी हिरासत में हैं। शायद कोई बातचीत, या नेगोशिएशन, या कोई डील हुई होगी। इसलिए वे वापस आ गए।'ज़िंदगी बस एक सवाल है...अजीत डोभाल ने कहा, 'मुझे पता था कि यह मेरे करियर का अंत था। जांच पूरी हो गई। मुझमें कोई गलती नहीं पाई गई, शायद मैंने सब कुछ सही किया था। लेकिन फिर भी मैं बहुत दुखी था। मेरा एक साथी था, एक बूढ़ा तिब्बती शेरपा, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो का सदस्य था और मेरे साथ काम करता था, उसने कहा कि यह सब मैप रीडिंग की बात है, ज़िंदगी बस एक सवाल है, कुछ लोग अपनी मैप रीडिंग सही कर लेते हैं; दूसरे गलत कर लेते हैं।'