इंदौर: शनिवार शाम एक तरफ IDA मैदान के भीतर राहुल गांधी छात्रों के बीच बैठे थे। दूसरी तरफ मैदान के बाहर भी बड़ी संख्या में युवा बड़ी स्क्रीन पर कार्यक्रम देख रहे थे। अंदर जगह नहीं मिली तो इंजीनियरिंग के छात्र नकुल दवे जैसे कई युवा बाहर ही रुक गए। आसपास की सड़कों पर वाहनों की कतारें थीं और कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर छात्रों और युवाओं की भीड़ के बीच लगातार नारे सुनाई दे रहे थे।पारंपरिक शैली की बजाय प्रोफेसर की तरह संवादकरीब 60 मिनट के इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने पारंपरिक राजनीतिक भाषण के बजाय प्रोफेसर की तरह छात्रों से बारी-बारी से संवाद किया। किसी ने भर्ती परीक्षा में वर्षों से अटकी नियुक्तियों की बात की, किसी ने नर्सिंग की पढ़ाई छह साल में भी पूरी नहीं होने की शिकायत की, तो किसी ने हॉस्टल और सरकारी शिक्षा व्यवस्था की कमी का सवाल उठाया। राहुल ने इन सवालों के जवाब में बार-बार शिक्षा, रोजगार और सरकारी सिस्टम को चर्चा के केंद्र में रखा। छात्रों की गूंज का इंदौर संस्करण इस अभियान का पांचवां कार्यक्रमथा। इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में कार्यक्रम हो चुके हैं।बाहर स्क्रीन पर भी जुटे छात्रकार्यक्रम स्थल पर क्षमता से ज्यादा छात्रों के पहुंचने का असर मैदान के बाहर साफ दिखा। कई छात्र अंदर नहीं जा सके और बड़ी स्क्रीन पर कार्यक्रम देखते रहे। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे नकुल दवे ने कहा कि भीड़ ज्यादा होने की वजह से उन्हें अंदर जाने की जगह नहीं मिली, इसलिए बाहर स्क्रीन पर ही कार्यक्रम देखना पड़ा। IDA मैदान के आसपास छात्र समूहों में खड़े रहे। कार्यक्रम शुरू होने के साथ ही नारेबाजी तेज होती गई। भीड़ बढ़ने के कारण आसपास की सड़कों पर यातायात भी प्रभावित हुआ और कई किलोमीटर तक जाम की स्थिति बनी। कार्यक्रम के लिए पहले नेहरू स्टेडियम का प्रस्ताव था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद इसे क्षेत्रीय पार्क के सामने IDA की जमीन पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की तारीख भी 12 सितंबर से बढ़ाकर 19 सितंबर की गई थी।राहुल ने कहा- सिस्टम नहीं चाहता कि स्टूडेंट सवाल पूछेमंच पर राहुल गांधी ने छात्रों से कहा कि सिस्टम को सबसे ज्यादा खतरा सवाल पूछने वाले स्टूडेंट से है। उनके मुताबिक, इसी वजह से सिस्टम ऐसे लोगों को बढ़ावा देता है जो सवाल नहीं पूछते। उन्होंने छात्रों और अंधभक्त के बीच अंतर बताते हुए कहा कि स्टूडेंट सवाल करता है, जबकि अंधभक्त सवाल नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि स्टूडेंट प्यार और संवाद की बात करता है, जबकि उनके अनुसार अंधभक्ति नफरत और डर पैदा करती है। राहुल ने छात्रों से कई राजनीतिक और संस्थागत सवाल भी पूछे। उन्होंने पूछा कि अमित शाह के बेटे ICC के चेयरमैन कैसे बने, देश के कारोबार पर कुछ लोगों का कब्जा कैसे हुआ और न्यायपालिका तथा चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं अपना काम क्यों नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों का सवाल पूछना लोकतंत्र के लिए जरूरी है।हम सिस्टम से हार गए : छात्रों की तरफ से आया जवाबराहुल ने छात्रों के बीच यह सवाल भी रखा कि क्या उनका सिस्टम से भरोसा उठ गया है। उन्होंने कहा कि कई जगह उम्मीदवारों की भी गलतियां हो सकती हैं। इस पर सामने स्टेज पर पहुंचे छात्रों की ओर से जवाब आया कि सर, हम सिस्टम से हार गए। यही वाक्य कार्यक्रम के दौरान छात्रों की शिकायतों का एक तरह से सार बन गया। अलग-अलग छात्र अलग-अलग समस्याएं लेकर मंच पर आए, लेकिन उनकी शिकायतों में एक बात समान थी पढ़ाई पूरी करने, परीक्षा देने, नौकरी पाने और अपने भविष्य का रास्ता तय करने में व्यवस्था से लगातार टकराव।MPPSC की तैयारी कर रहे छात्र ने कहा हम ओवर एज हो गएसतना के अखिल भारती क्रांति ने बताया कि वह MPPSC की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में 13 फीसदी पद लंबे समय से होल्ड हैं। उनका दावा था कि प्री, मेंस और इंटरव्यू तक पूरा होने के बाद भी नियुक्तियां अटक जाती हैं। उन्होंने कहा कि उनके जैसे करीब 4.87 लाख छात्र इस स्थिति से प्रभावित हैं और कई अभ्यर्थी उम्र सीमा पार कर चुके हैं। मंच से उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि 2018 में बनाए गए कानून के बाद से ही यह समस्या बनी हुई है और कोर्ट का हवाला देकर नियुक्तियां रोकी जा रही हैं।नर्सिंग छात्रा की कहानी- 2020 में एडमिशन, 2026 में भी थर्ड ईयरनर्सिंग छात्रा याशिका दानी ने राहुल को बताया कि उसने 2020 में एडमिशन लिया था। उसे उम्मीद थी कि चार साल में कोर्स पूरा हो जाएगा, लेकिन 2026 में भी वह थर्ड ईयर में है। उसने कहा कि न तो रिजल्ट आया और न ही चौथे वर्ष की परीक्षा हो रही है। जिस उम्मीद के साथ उसने पढ़ाई शुरू की थी कि डिग्री पूरी करके नौकरी करेगी, वह पूरी नहीं हो पा रही है। उसकी शिकायत सिर्फ परीक्षा और रिजल्ट तक सीमित नहीं थी। उसके शब्दों में छह साल पढ़ाई करने के बाद भी वह खुद को बेरोजगार स्थिति में पा रही है।राजगढ़ की सपना गुर्जर ने आरक्षण और सरकारी भर्ती का मुद्दा उठाया। उसने कहा कि मार्च 2019 में कांग्रेस सरकार ने 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण लागू किया था, लेकिन सरकार बदलने पर कई पदों पर नियुक्तियां रोक दी गईं। मंच पर छात्र अपनी बात रखते रहे और राहुल बीच-बीच में उनसे सवाल पूछते रहे। इस वजह से कार्यक्रम का स्वर एकतरफा भाषण से ज्यादा सवाल-जवाब का रहा।दिल्ली PG हादसे की क्लिप दिखाई, हॉस्टल व्यवस्था पर सवालराहुल गांधी ने दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हॉस्टल हादसे की क्लिप भी छात्रों को दिखाई। उन्होंने इसे सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जोड़ते हुए कहा कि अगर बेहतर सुविधाएं होतीं तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने 6 सितंबर को दिल्ली हॉस्टल हादसे में जान गंवाने वाले देवास निवासी 21 वर्षीय छात्र अर्पित जाज के परिवार से भी मुलाकात की। अर्पित के परिवार की पीड़ा का जिक्र करते हुए उनके दादा ने कहा कि उनका पोता दिल्ली पढ़ने गया था और अब नहीं रहा। राहुल ने कहा कि अगर अच्छी सुविधाएं होतीं तो ऐसी घटना नहीं होती।राहुल बोले- शिक्षा सरकार की जिम्मेदारी ये आपका काम नहींराहुल ने शिक्षा को अधिकार और सरकारी जिम्मेदारी के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट देश की नींव है और शिक्षा कोई लग्जरी नहीं है। उन्होंने कहा कि किंडरगार्टन से लेकर मिड-डे मील, स्कूल, कॉलेज और रोजगार तक की व्यवस्था करना छात्रों का काम नहीं, सरकार की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक सरकार को सिस्टम चलाना चाहिए, लेकिन देश में इसका उलटा हो रहा है। राहुल ने शिक्षा के बजट, सरकारी स्कूलों और शिक्षकों के खाली पदों का मुद्दा भी उठाया। उनके भाषण में दावा किया गया कि UPA के दौरान शिक्षा पर बजट का 4.6 प्रतिशत खर्च होता था, जो अब 2.6 प्रतिशत है। पिछले दस वर्षों में 1.5 करोड़ स्कॉलरशिप कम हुई हैं और करीब 10 लाख शिक्षक पद खाली हैं। ये आंकड़े राहुल गांधी की ओर से कार्यक्रम में रखे गए दावे हैं।उन्होंने सरकारी स्कूलों और हॉस्टल की कमी को भी छात्रों की मुश्किलों से जोड़ा। राहुल के अनुसार देश में एक लाख सरकारी स्कूल बंद हुए हैं, जिनमें 55 प्रतिशत मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में हैं। उन्होंने कहा कि 100 में सिर्फ 14 छात्रों को हॉस्टल की सुविधा मिल पाती है।PM मोदी की मिमिक्री भी हुईकार्यक्रम में राजनीतिक भाषणों के बीच हल्का-फुल्का माहौल भी देखने को मिला। मंच पर एक हास्य कलाकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। उसने हंसने और पीठ थपथपाने की एक्टिंग की, जिस पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया देखने को मिली।मंच के भीतर संवाद, बाहर इंतजार करते छात्रइंदौर का यह कार्यक्रम सिर्फ मंच पर दिए गए भाषण तक सीमित नहीं रहा। मैदान के भीतर छात्र अपनी समस्याएं लेकर राहुल तक पहुंचने की कोशिश करते रहे, जबकि बाहर खड़े युवाओं की बड़ी संख्या स्क्रीन पर संवाद देखती रही। कार्यक्रम से पहले ही कांग्रेस ने बड़ी संख्या में युवाओं को जुटाने की तैयारी की थी। पार्टी ने शिक्षा, भर्ती, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को कार्यक्रम के केंद्र में रखा था। दिलचस्प यह रहा कि राहुल ने छात्रों को सिर्फ सुनने के बजाय उनसे लगातार सवाल-जवाब किया। कभी वह किसी छात्र की बात के बाद उसी मुद्दे पर दूसरा सवाल करते दिखे तो कभी किसी समस्या को बड़े सिस्टम से जोड़कर समझाने की कोशिश की।