Bappa Morya Ki Khani: गणेश उत्सव का पावन पर्व पूरे देश में बड़े ही धूमधाम और भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है. साल 2026 में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन विघ्नहर्ता घर-घर विराजे थे और अब 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ 10 दिवसीय गणेश उत्सव का समापन होगा. स्थापना से लेकर विसर्जन की यात्रा तक, गलियों और पंडालों में एक ही जयकारा सबसे जोर-शोर से गूंजता है गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया. हम बचपन से ही बप्पा के नाम के साथ 'मोरया' बोलते आ रहे हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान गणेश के साथ यह 'मोरया' शब्द कैसे जुड़ा और इसका असली अर्थ क्या है? आइए, इस प्रसिद्ध जयकारे के पीछे की कहानी को विस्तार से समझते हैं.भक्त मोरया गोसावी की कहानीमोरया गोसावी को भगवान गणेश का बड़ा भक्त माना जाता है. उनकी गणेश भक्ति का प्रमुख संबंध महाराष्ट्र के मोरगांव और चिंचवड़ से बताया जाता है. मान्यता है कि उन्होंने अपना जीवन भगवान गणेश की पूजा और साधना में समर्पित कर दिया था. कहा जाता है कि मोरया गोसावी गणेश जी के दर्शन के लिए मोरगांव जाया करते थे. उस समय यात्रा आसान नहीं थी, लेकिन उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि कठिन रास्ता भी उनके लिए आस्था के रास्ते में बाधा नहीं बना. धीरे-धीरे मोरया गोसावी का नाम गणेश भक्ति के साथ जुड़ता चला गया.भगवान गणेश के नाम के साथ 'मोरया' कैसे जुड़ा?प्रचलित कथा के अनुसार, मोरया गोसावी की भगवान गणेश के प्रति भक्ति इतनी गहरी थी कि उनका नाम ही गणेश भक्ति की पहचान बन गया. महाराष्ट्र की गणेश भक्ति परंपरा में मोरया का जयघोष धीरे-धीरे लोकप्रिय होता गया. एक मान्यता यह भी बताती है कि मोरया गोसावी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उन्हें दर्शन दिए थे. उनकी भक्ति और गणपति के प्रति समर्पण की वजह से मोरया नाम गणेश जी के जयकारे के साथ जुड़ गया. यानी गणपति बप्पा मोरया में मोरया शब्द भगवान गणेश का दूसरा नाम नहीं, बल्कि उनकी भक्ति से जुड़े संत मोरया गोसावी के नाम से जुड़ी परंपरा के रूप में बताया जाता है.'बप्पा' का क्या मतलब होता है?जयकारे में सिर्फ मोरया ही खास नहीं है, बल्कि बप्पा शब्द भी भक्तों की भावनाओं को दिखाता है. बप्पा शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर पिता, संरक्षक या अपनेपन वाले व्यक्ति के लिए सम्मान के साथ किया जाता है. भक्त भगवान गणेश को अपने परिवार के सदस्य और संकट में साथ देने वाले देवता के रूप में देखते हैं. इसलिए प्यार और श्रद्धा से उन्हें गणपति बप्पा कहा जाता है. जब इसके साथ मोरया जुड़ता है, तो यह जयकारा गणेश भक्ति और मोरया गोसावी की भक्ति परंपरा दोनों से जुड़ जाता है.ये भी पढ़ें: गणपति विसर्जन के बाद कलश का क्या करना चाहिए? भूलकर भी न करें ये गलती!Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.