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DUSU में बिखरा विपक्ष, ABVP जीतीः प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- अपोजिशन सिर्फ संसद सत्र में एकजुट, उसके बाद अपनी मर्जी का मालिक
नई दिल्लीः दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को तीन प्रमुख पदों मिली जीत को शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने विपक्ष के बिखराव का नतीजा बताया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों में एकता सिर्फ संसद सत्र के दौरान देखने को मिलती है, यह सही बात है। लेकिन उसके बाद तो हर कोई अपनी मर्ज़ी का मालिक होता है।डूसू चुनाव पर बिखरे विपक्ष का दिखा असरअसल में, ABVP ने प्रेसिडेंट का पद 2,053 वोटों के अंतर से जीता, जबकि अलग-अलग चुनाव लड़ रहे लेफ्ट को 5,377 वोट मिले। ABVP ने सेक्रेटरी का पद 6,781 वोटों के अंतर से जीता, जबकि लेफ्ट को 8,734 वोट मिले। वहीं ABVP ने जॉइंट सेक्रेटरी का पद 837 वोटों के अंतर से जीता, जबकि समाजवादी छात्र सभा और लेफ्ट को कुल 21,615 वोट मिले। अकेले लेफ्ट को 5,837 वोट मिले।इसी तरह नोटा के लिहाज से देखा जाए तो प्रेसिडेंट पद पर अंतर दो हजार के करीब था, लेकिन करीब साढ़े चार हजार स्टूडेंट्स ने नोटा को वोट देना पसंद किया। जॉइंट सेक्रेटरी में हजार से कम का फासला था लेकिन 7 हजार से ज्यादा बच्चों ने लाइन में लगकर नोटा का बटन दबाया।संसद सत्र के बाद सब अपनी मर्जी के मालिकः प्रियंका चतुर्वेदीदिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में बीजेपी की स्टूडेंट विंग को मिली जीत पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, 'संसद का सत्र चलने पर ही एकता दिखती है। सच है। उसके बाद तो हर कोई अपनी मर्ज़ी का मालिक होता है... सत्र के बाद एक बैठक होनी थी, पता नहीं वह हुई या नहीं? पश्चिम बंगाल के उपचुनाव में भी किसी साझा उम्मीदवार पर सहमति नहीं बन पाई। सच है।'छात्र संघ चुनाव के आंकड़े बता रहे हैं कि एबीवीपी के मुकाबले में बाकी छात्र संगठन अगर एकजुट होते तो नतीजा अलग होता, जिस तरफ प्रियंका चतुर्वेदी ने इशारा किया और कहा कि विपक्ष की एकता संसद सत्र में तो दिखती है लेकिन चुनाव मैदान में सब अपनी मर्जी के मालिक होते हैं।
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नवभारत टाइम्स
· Varun Shailesh