DUSU चुनावों में हार के बाद गलत टिकट बंटवारे को लेकर NSUI में सवाल उठ रहे हैं। एनएसयूआई से बागी हुए निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने बंपर वोटों से उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। वहीं आधिकारिक उम्मीदवार तीसरे स्थान पर पिछड़ गए। इसी तरह संयुक्त सचिव पद पर भी बागी उम्मीदवार को बेहतर वोट मिले। इस तरह संगठन के एक बागी उम्मीदवार ने भारी अंतर से जीत हासिल की जबकि दूसरे ने कड़ी टक्कर दी। अब डूसू चुनावों में एनएसयूआई के चारों मुख्य पदों पर हार के बाद कांग्रेस के छात्र संगठन के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के इंचार्ज <a class=backlink target=_blank href=https://www.livehindustan.com/tags/kanhaiya-kumar data-vars-anchor-text=कन्हैया कुमार data-vars-link-type=Auto data-vars-page-type=story>कन्हैया कुमार के अधीन टिकट बंटवारे पर सवाल उठने लगे हैं।बताते हैं कि निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने NSUI से टिकट मांगा था। शुरुआत में संगठन ने उन्हें नॉमिनेट भी किया था, लेकिन बाद में उनसे अपना नॉमिनेशन वापस लेने के लिए कहा गया। उन्होंने 30,615 वोट पाकर वाइस-प्रेसिडेंट का पद जीता जो ABVP के इशू मौर्य को मिले 16,910 वोटों से लगभग दोगुना था। वहीं NSUI के उम्मीदवार वीर छत्रथ को महज 4,313 वोट मिले। वह तीसरे स्थान पर रहे। वीर छत्रथ कांग्रेस के सीनियर नेता मनीष छत्रथ के बेटे हैं।विशेष यादव जो NSUI से टिकट के एक और बड़े दावेदार थे। सूत्र बताते हैं कि उनको पहले संयुक्त सचिव का टिकट देने की बात कही गई थी लेकिन इनका टिकट भी काट दिया गया। आखिरकार विशेष यादव ने समाजवादी छात्र सभा के समर्थन से चुनाव लड़ा। वह 15,778 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे जबकि ABVP के लक्ष्य राज सिंह को 16,615 वोट मिले। इस पद के लिए NSUI के गोपाल चौधरी तीसरे स्थान पर रहे। उनको 15,206 वोट मिले।अपडेट जारी