पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने नाम कटे और कितने जुड़े, बल्कि यह है कि लाखों लंबित अपीलों का फैसला आखिर कब तक होगा? चुनाव आयोग ने 18 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIR से जुड़े आदेशों के खिलाफ कुल 38,20,683 अपील दाखिल की गई हैं. इनमें से अभी तक सिर्फ 1,02,231 अपीलों का निपटारा हुआ है.जिसका मतलब है कि 37,18,452 अपील अब भी लंबित हैं. इन मामलों को सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं. ये ट्रिब्यूनल अप्रैल 2026 से काम कर रहे हैं. करीब पांच महीने में 1.02 लाख मामलों का निपटारा हुआ है. अब अगर सिर्फ इसी रफ्तार को आधार बनाकर गणित किया जाए, तो बाकी 37.18 लाख मामलों की तस्वीर काफी लंबी दिखाई देती है.लगभग 15 साल 9 महीने का अनुमान19 ट्रिब्यूनल ने करीब 13 अप्रैल 2026 से 18 सितंबर 2026 तक लगभग 158 दिनों में 1,02,231 अपीलें निपटाईं. यानी औसतन करीब 647 अपील रोज निपटाई गईं. इसी औसत रफ्तार को अगर आगे भी एक जैसा मान लिया जाए, तो 37,18,452 लंबित अपीलों को निपटाने में करीब 5,750 दिन लगेंगे. यानी लगभग 15 साल 9 महीने, या आसान भाषा में कहें, तो करीब 16 साल. इसका मतलब यह नहीं है कि वास्तव में मामले 16 साल में ही खत्म होंगे. यह सिर्फ मौजूदा औसत रफ्तार पर आधारित गणित है.37 लाख से ज्यादा लंबित अपीलट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ सकती है, सुनवाई की गति बढ़ सकती है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, कुछ मामलों को प्राथमिकता दी जा सकती है. इसलिए असली समय इससे काफी कम भी हो सकता है. लेकिन मौजूदा आंकड़ा यह जरूर दिखाता है कि 37 लाख से ज्यादा लंबित अपीलों के लिए मौजूदा रफ्तार पर्याप्त नहीं दिखती.SIR की पूरी तस्वीर कुछ आंकड़ों से समझी जा सकती है- 38,20,683 कुल अपील दाखिल हुईं. 1,02,231 अपीलों का निपटारा हो चुका है. 37,18,452 अपील अभी लंबित हैं. करीब 97.3 फीसदी अपील अभी भी बाकी हैं. अपीलों की सुनवाई के लिए 19 ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं. ट्रिब्यूनल ने अप्रैल 2026 से काम करना शुरू किया था. करीब 700 न्यायिक अधिकारियों ने इससे पहले लगभग 60 लाख दावों और आपत्तियों की जांच की थी.37.18 लाख में कितने दिन?यही इस पूरी खबर का सबसे अहम गणित है. 13 अप्रैल से 18 सितंबर तक करीब 158 दिन माने जाएं और इस दौरान 1,02,231 अपीलों का निपटारा हुआ, तो औसतन:1,02,231 ÷ 158 = करीब 647 अपील रोज.अब लंबित मामलों की संख्या है: 37,18,452 अपील.अगर हर दिन औसतन 647 अपील ही निपटती रहीं तो:37,18,452 ÷ 647 = करीब 5,750 दिन (यानी करीब 15.75 साल)महीनों में देखें तो यह लगभग 189 महीने बैठता है. साल में बदलें तो करीब 15 साल 9 महीने. मतलब, अगर 18 सितंबर 2026 से यही रफ्तार जारी रहती है तो गणितीय अनुमान के मुताबिक लंबित मामलों का पूरा स्टॉक करीब जून 2042 के आसपास खत्म हो सकता है. लेकिन यह सिर्फ अनुमान है, आधिकारिक समयसीमा नहीं. क्योंकि अगले महीनों में ट्रिब्यूनल ज्यादा तेजी से काम कर सकते हैं.किन-किन वजहों से कटे हैं नाम?वकील गोपाल शंकरनारायणन के मुताबिक, SIR से जुड़े 83 हजार मामलों में फैसला आ चुका है, जिनमें करीब 75 हजार मामलों में नाम काटना गलत पाया गया. उनके अनुसार कुल करीब 38 लाख मामले हैं, जिनमें 31 लाख नाम कटने के खिलाफ और 7 लाख नाम बचाने से जुड़े हैं.TMC का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में BJP को 2.93 करोड़ और TMC को 2.60 करोड़ वोट मिले थे, यानी अंतर करीब 30 लाख का था. पार्टी के मुताबिक 31 सीटों पर जीत का अंतर SIR में कटे नामों से कम है. 23 अप्रैल को जस्टिस जे बागची ने भी पूछा था कि अगर जीत का अंतर 2% हो और 15% लोग वोट न डाल पाएं तो इसका क्या असर होगा.'समयबद्ध तरीके से निपटाएं'- सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त की सुनवाई में चुनाव आयोग से अपीलों की संख्या, उनके निपटारे और लंबित मामलों की जानकारी मांगी थी. अदालत ने यह भी पूछा था कि व्यवस्था को बेहतर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और कितने अतिरिक्त ट्रिब्यूनल की जरूरत हो सकती है. अब चुनाव आयोग के ताजा हलफनामे से पता चला है कि 38.20 लाख अपीलों में से सिर्फ 1.02 लाख का निपटारा हुआ है.अदालत ने इससे पहले 24 अप्रैल को उन मामलों को प्राथमिकता देने की बात कही थी, जिनमें मतदाता ने नाम हटाए जाने के खिलाफ तुरंत सुनवाई की जरूरत बताई थी. यानी सभी मामलों को एक ही क्रम में सुनने के बजाय जरूरी मामलों को पहले निपटाने का रास्ता भी मौजूद है.19 ट्रिब्यूनल हैं, फिर भी इतनी बड़ी पेंडेंसी क्यों?37.18 लाख लंबित अपीलों को सिर्फ एक तरह के मामले मानना सही नहीं होगा. चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को यह नहीं बताया है कि इनमें से कितनी अपीलें नाम जोड़ने की मांग से जुड़ी हैं और कितनी किसी नाम को हटाने की मांग से. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी अंतर को महत्वपूर्ण माना था.अदालत के सामने यह बात आई कि अगर किसी व्यक्ति का नाम हटाया गया है और वह उसे वापस जुड़वाने की अपील कर रहा है, तो उसका मामला उसके वोट देने के अधिकार से सीधे जुड़ता है. इसलिए अदालत ने ऐसे मामलों को प्राथमिकता देने की संभावना पर भी चर्चा की थी.34 लाख से ज्यादा नए Form 6 आवेदन भी आएSIR की इसी प्रक्रिया के दौरान 17 दिसंबर 2025 से 7 अगस्त 2026 तक 34.13 लाख Form 6 आवेदन भी दाखिल किए गए. Form 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए होता है. इसमें नए मतदाताओं के साथ वे लोग भी शामिल हो सकते हैं जो ड्राफ्ट SIR प्रक्रिया में बाहर हुए थे और दोबारा नाम जुड़वाना चाहते थे.लेकिन Form 6 के आवेदन और 38.20 लाख अपीलों को एक ही आंकड़ा नहीं माना जा सकता. दोनों अलग प्रक्रियाओं से जुड़े हैं. इसी तरह गणना चरण में बाहर हुए मतदाताओं और ट्रिब्यूनल में लंबित अपीलों की संख्या भी अलग-अलग चरणों के आंकड़े हैं.