Lal Chand Godara Success Story: पढ़ने और कुछ नया सीखने की कोई उम्र नहीं होती। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इन पक्तियों को सच कर दिखाया है हरियाणा के पूर्व फौजी लाल चंद गोदारा ने, जिन्होंने 85 साल की उम्र में एमए की डिग्री हासिल कर शानदार मिसाल पेश की है। इंडियन आर्मी में रह चुके गोदारा उम्र के इस पड़ाव पर इग्नू से पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री पाकर उन लोगों के सामने बड़ी नजीर बन गए हैं जो आर्थिक, पारिवारिक या अन्य मजबूरियों के चलते पढ़ाई नहीं कर पाते या शिक्षा बीच में ही छोड़ देते हैं। सिरसा के रहने वाले गोदारा के भीतर पढ़ाई का जज्बा और ललक इससे भी पता चलता है कि उन्होंने एमए में 1200 में से 965 अंक हासिल किए हैं।76 की उम्र में ग्रेजुएशन, 85 में एमएजिस उम्र में लोग दुनियादारी छोड़कर बीती यादों के साथ जीवन के अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ते हैं, पूर्व सैनिक लाल चंद गोदारा ने किताबों को अपना जीवनसाथी बना लिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक वे जब 71 साल के हुए तो उन्होंने पढ़ाई से दशकों दूर रहने के बाद फिर से बुक्स थामीं। 76 बरस की उम्र में उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। ​​अब 85 साल की उम्र में उन्होंने इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) से मास्टर ऑफ आर्ट्स (एमए) पूरा किया है।अभी और हासिल करना हैलेकिन गोदारा अभी यहीं नहीं रुकने वाले। उनका कहना है कि यह सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक गोदारा अब पीएचडी या फिर लॉ करने की तैयारी कर रहे हैं। यही उनके अब अगले टारगेट हैं। उनकी कहानी इस आयु में डिग्रियां हासिल करने से ज्यादा इस बात की मिसाल है कि उम्र को कभी यह तय करने का अधिकार नहीं देना चाहिए कि इंसान कब सीखना, कंपीट करना या सपने देखना छोड़ दे।शौक था पर पढ़ नहीं पाएगोदारा के लिए पढ़ाई उनकी जिंदगी का एक अधूरा ख्वाब रही थी। उनका जन्म ऐसे परिवार में हुआ, जहां पिछली पीढ़ियों को औपचारिक शिक्षा हासिल करने के सीमित अवसर मिले थे। उनके मन में पढ़ाई करने की इच्छा थी लेकिन हालात उन्हें जिंदगी में कहीं और ही ले गए। चीन और पाकिस्तान के खिलाफ युद्धों में हिस्सा लियाउन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा की और 1962, 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान दुश्मनों के छक्के छुड़ाए। उन्होंने कई वर्ष वर्दी में बिताए जबकि उनके हम उम्र लोग अपने करियर और परिवार को आगे बढ़ा रहे थे। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने हरियाणा परिवहन विभाग में नौकरी की और 1972 से 2002 तक यार्ड मास्टर के रूप में सेवाएं दीं। बेशक उन्होंने सैनिक रहते हुए देश की सुरक्षा के लिए सीने पर गोली खाने की हिम्मत रखी, लेकिन अनपढ़ता का ताना गोली खाने से भी ज्यादा दर्द देने जैसा था।सपने जिंदा रखे और खेलों में खूब मेडल जीतेलेकिन रिटायरमेंट का मतलब उनके लिए महत्वाकांक्षाओं का अंत नहीं था। इसके बजाय, उन्हें अपनी नई मंजिलों की ओर बढ़ने की आजादी मिली। उन्होंने कंपीटिटिव एथलेटिक्स का रुख किया और मास्टर्स स्पोर्ट्स की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने हरियाणा, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके पदकों की संख्या बढ़ती गई। आज उनके खाते में करीब 200 पदक हैं। इनमें लगभग 150 स्वर्ण, 30 रजत और 20 कांस्य पदक शामिल हैं।पोतियों ने भी खूब साथ दियालेकिन इसी दौरान उनकी एक पुरानी इच्छा फिर से मन में आ गई। 76 साल की उम्र में गोदारा ने दोबारा किताबें उठा लीं। जिस व्यक्ति ने अपनी जिंदगी का अधिकांश हिस्सा औपचारिक शिक्षा से दूर बिताया हो, उसके लिए इतनी उम्र में पढ़ाई की ओर लौटना अटपटा और मुश्किल हो सकता है। लेकिन गोदारा के लिए यह एक अधूरा काम था जिसे उन्हें पूरा करना था। पांच साल बाद 81 वर्ष की उम्र में उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल कर ली। इस लक्ष्य को पाने में उनकी पोतियों ने भी खूब साथ दिया। उन्होंने इसे अपनी शैक्षणिक यात्रा का अंतिम पड़ाव मानने के बजाय अगली मंजिल की सीढ़ी बनाया। उन्होंने इग्नू के जरिए एमए कोर्स में दाखिला लिया और पढ़ाई जारी रखी। अब उसका परिणाम भी आ चुका है। 85 साल की उम्र में उन्होंने 1,200 में से 965 अंक हासिल किए हैं।गोदारा के लिए शिक्षा सिर्फ अपने नाम के आगे नई डिग्रियां जोड़ना नहीं है। उनका मानना है कि सीखने से व्यक्ति का नजरिया व्यापक होता है और दिमाग सक्रिय रहता है। उनके अनुसार उम्र अनुभव का पैमाना हो सकती है, लेकिन महत्वाकांक्षा की अंतिम सीमा नहीं। रिटायरमेंट के बाद उनका जीवन इसका शानदार उदाहरण है।अब 85 साल की उम्र में भी उनकी नजर आगे की मंजिल पर है। उनकी कामयाबी देखकर यकीनन ये पक्तियां याद आती है - लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। इंसान अगर ठान ले तो आसमान को भी झुका सकता है फिर उसके लिए कोई उम्र मायने नहीं रखती।