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27 सितंबर को बेटी की शादी, उससे पहले ही परिवार की तीन पीढ़ियां खत्म; आगर-मालवा के नाले में बह गईं 8...
Agar-Malwa Accident: मध्य प्रदेश के आगर-मालवा में हुए एक भीषण हादसे ने परिवार की तमाम खुशियों, सपनों और उम्मीदों को पल भर में हमेशा के लिए दफन कर दिया. दरअसल, उड़ीसा राज्य के भुवनेश्वर के जयदेव विहार चौक पर ढाबा चलाने वाले बनमाली बेहरा के घर में इन दिनों खुशियों की गूंज थी. पूरा परिवार दो बड़े और शुभ अवसरों की तैयारियों में लगा हुआ था. एक तरफ नए घर में प्रवेश का सपना आकार ले रहा था, तो दूसरी तरफ उनकी 30 वर्षीय बेटी राधारानी बेहरा के हाथ पीले होने वाले थे. आगामी 27 सितंबर को शादी की रस्म तय थी, और पूरा परिवार उत्साह के साथ यात्रा से लौटकर शहनाइयों की गूंज सुनने का इंतजार कर रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.जिस घर से 27 सितंबर को बेटी की डोली उठनी थी और जहां नए घर के गृह प्रवेश के लिए पूजा की तैयारियां हो रही थीं, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और अपनों को खोने का चीत्कार है. बनमाली बेहरा पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती. एक साथ पूरे परिवार की तीन पीढ़ियों का खत्म हो जाना पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. गडकाना इलाके के लोग इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि कुछ दिन पहले मुस्कुराते हुए विदा हुए चेहरे अब कभी वापस नहीं लौटेंगे.बरसाती नाले कार बहने से हादसादरअसल, आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में बारिश से उफनते नाले में श्रद्धालुओं से भरी कार बह जाने से एक ही परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छिन गईं. इस दर्दनाक हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई. मृतकों में तीन बच्चे, दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं. इनमें सात लोग ओडिशा के रहने वाले थे, जबकि कार चालक आगर-मालवा जिले के बड़ौद निवासी अरुण गोयल था. हादसे के बाद भुवनेश्वर के गडकाना इलाके में रहने वाले बेहरा परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. वहीं मृतकों में 30 वर्षीय राधारानी बेहरा भी शामिल थीं. राधारानी की शादी की रस्म 27 सितंबर को होनी थी.परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था। घर में नए रिश्ते की खुशी दस्तक देने वाली थी. इसी बीच परिवार धार्मिक यात्रा पर निकला था. उन्होंने 16 सितंबर को अपनी यात्रा शुरू की थी उन्हें क्या पता था कि यह यात्रा परिवार की आखिरी यात्रा बन जाएगी. बेहरा परिवार की जयदेव विहार चौक पर एक ढाबा भी था. परिवार कारोबार के साथ-साथ अपने बच्चों और रिश्तेदारों के भविष्य को लेकर सपने संजो रहा था. एक तरफ बेटी की शादी की तैयारी थी, तो दूसरी तरफ नए घर में प्रवेश की तैयारी चल रही थी. घर में शुभ कार्यों को लेकर उत्साह था, लेकिन नलखेड़ा के एक बरसाती नाले ने कुछ ही पलों में इन सारी खुशियों को चीख-पुकार और मातम में बदल दिया.हादसे में 8 लोगों की मौतआगर-मालवा के एसपी दिलीप कुमार सोनी ने बताया कि नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के पास बारिश से उफनते नाले में श्रद्धालुओं से भरी कार बह गई. पिछली रात हुई तेज बारिश के कारण नाले का जलस्तर काफी बढ़ गया था. पानी का बहाव इतना तेज था कि कार उसमें बह गई और उसमें सवार लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. फिलहाल पोस्टमार्टम के बाद उत्सव को सम्मानपूर्वक उनके घर भेज दिया गया है.हादसे में तीन बच्चों, दो महिलाओं और तीन पुरुषों समेत आठ लोगों की मौत हुई है. उन्होंने बताया कि सात मृतक ओडिशा के रहने वाले थे और उज्जैन से कार किराए पर लेकर मां बगलामुखी मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचे थे. कार चालक अरुण गोयल आगर-मालवा जिले के बड़ौद का रहने वाला था. वहीं मृतकों की पहचान राधारानी बेहरा, ज्ञानेंद्र कुमार बेहरा, रितारानी पत्नी ज्ञानेंद्र बेहरा, बी. साई बेहरा, शाहिरा, कृष्णा राजवीर पुत्र शिवप्रसाद बेहरा और शिवप्रसाद बेहरा के रूप में हुई है. इस हादसे ने एक परिवार की कई पीढ़ियों को गहरा जख्म दिया है.घर में चल रही थीं शादी की तैयारियांहादसे की खबर जैसे ही ओडिशा पहुंची, बेहरा परिवार के घर में कोहराम मच गया. जिन हाथों से बेटी की शादी की तैयारियां होनी थीं, वही हाथ अब अपनों के अंतिम दर्शन के इंतजार में रह गए. जिस घर में कुछ दिनों बाद शादी के गीत गूंजने थे, वहां अब मातम पसरा है. परिवार के लिए 27 सितंबर की तारीख, जो कभी नई जिंदगी की शुरुआत का दिन बनने वाली थी अब दर्दनाक याद बन गई है.हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भी आक्रोश देखने को मिला. लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अंबेडकर चौक पर चक्काजाम कर दिया. मौके पर प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद ओडिशा के सात मृतकों के शव भुवनेश्वर भेज दिए गए.मृतकों के परिवार को आर्थिक मदद का ऐलानघटना पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गहरा दुख जताया. उन्होंने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की और कहा कि मध्य प्रदेश सरकार तथा स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर शवों को सम्मानपूर्वक ओडिशा लाने की व्यवस्था की गई है. उन्होंने अधिकारियों को पीड़ित परिवारों के लगातार संपर्क में रहने और हरसंभव सहयोग देने के निर्देश दिए.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर शोक जताया. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी हादसे को अत्यंत दुखद बताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई. उन्होंने राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिवार को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए.सीएम ने हादसे पर जताया दुखमुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी हादसे को अत्यंत दुखद बताया. उन्होंने ओडिशा से मध्यप्रदेश धार्मिक यात्रा पर आए श्रद्धालुओं की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई. सीएम ने राज्य शासन की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने और हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने के अधिकारियों को निर्देश दिए. उन्होंने बाबा महाकाल से दिवंगतों को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल परिवारों को यह गहन दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की.ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी हादसे पर दुख जताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि मध्यप्रदेश में हुई इस दर्दनाक दुर्घटना में सात ओडिया श्रद्धालुओं की जान जाने की खबर से उन्हें गहरा दुख हुआ है. उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की.खुशियों से पहले छाया मातमएक परिवार जो शादी और नए घर में प्रवेश जैसे दो शुभ अवसरों की तैयारी कर रहा था, आज अपनों के अंतिम संस्कार की पीड़ा से गुजर रहा है. राधारानी के हाथों में जल्द ही शादी की मेहंदी लगने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया कि परिवार की सारी खुशियां एक बरसाती नाले की तेज धार में बह गईं. नलखेड़ा का यह हादसा पीछे छोड़ गया है कई सवाल, कई आंसू और उन परिवारों के लिए ऐसा दर्द, जिसे शब्दों में बयां करना शायद संभव नहीं.
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TV9 हिंदी
· शिव चौबे