सुरेंद्र कोली के कथित आत्महत्या के बाद हरिद्वार पहुंचे उनके परिवार ने मीडिया से दूरी बनाए रखी, क्योंकि वे 20 ...और पढ़ें
कोली के परिवार ने मीडिया से दूरी बनाई, बदनामी से बचने के लिए।
निठारी कांड के बाद भी समाज का नजरिया नहीं बदला, परिवार दुखी।
कोली की मौत पर उठे सवाल, चेहरे पर खून और रस्सी की गांठ।
मेहताब आलम, हरिद्वार। सुरेंद्र कोली के फांसी लगाने की सूचना पर उसके तीनों भाई व बेटा हरिद्वार जरूर पहुंचे, मगर वह मीडिया की नजरों से बचते और छिपते रहे। जिला अस्पताल के एक कोने में बैठे स्वजनों के चेहरों पर 20 साल से झेल रहे निठारी का दंश साफ नजर आया। कोली की आत्महत्या को लेकर आंखों में सवाल तैरते रहे, मगर होठों पर चुप्पी छायी रही।
सुरेंद्र कोली के भाई हरीश कोली, चंदन और आनंद के साथ ही उसका बेटा शिवम मीडिया से बातचीत करने से परहेज करते रहे। दिल्ली में वे कहां रहते हैं, क्या करते हैं, बरी होने के बाद कोली से उनके संपर्क व संबंध कैसे रहे हैं, इसको लेकर उन्होंने किसी से कोई बातचीत नहीं की।
भाई होने के नाते अंतिम संस्कार का फर्ज अदा करने वह हरिद्वार जरूर पहुंचे, लेकिन उन्हें डर लगता रहा कि किसी मीडिया प्लेटफार्म उनकी फोटो-वीडियो प्रसारित न हो जाए। लोगों को यह पता चल गया कि वे सुरेंद्र कोली के भाई हैं तो शायद आस-पास के लोग उनका रहना दुभर न कर दें। गांव में सामाजिक बहिष्कार के चलते परिवार पहले ही मानसिक पीड़ा से गुजरता आ रहा है।
उनके मन में यह टीस भी रही कि सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद भी कोली को लेकर लोगों का नजरिया नहीं बदला। इसके लिए उन्होंने मीडिया ट्रायल को भी एक हद तक जिम्मेदार ठहराया। एक भाई ने तो यहां तक कहा कि सुरेंद्र तो यह सब झेल गया, लेकिन समाज के तानों को हम कब तक, कैसे झेल पाएंगे।
कोली के भाई ने बताया कि 2006 में निठारी कांड से लेकर 2026 तक 20 साल तक उनका परिवार हर दिन अग्नि परीक्षा देता आ रहा है। कोली खुद इसी दोहरी जिंदगी से गुजर रहा था। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बावजूद उसे हरिद्वार में सदाराम नाम से रहना पड़ा। बताया कि मां की मौत हो गई। कोली की पत्नी के घर छोड़ गई। उसकी बेटी की शादी कोली के भाईयों ने की और बेटे की देखभाल भी वही कर रहे हैं।
ऐसा नहीं है कि कोली अपने परिवार के साथ रहना नहीं चाहता था या परिवार उसे साथ नहीं रखना चाहता था। सुप्रीम कोर्ट ने सुबूतों और गवाहों की रोशनी में उनके भाई को बरी कर दिया, मगर लोग अभी तक यह मानते हैं कि बच्चों का अपहरण व हत्या में पंढेर और कोली का हाथ रहा है।
कोली के स्वजनों के अलावा पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत के मन में कई सवाल उठते रहे। खासतौर पर चेहरे पर खून लगा होने का कारण उन्हें खल रहा है। रस्सी टूटना और टूटने का तरीका भी समझ से परे है।
इस बारे में पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने मीडिया से बातचीत में कोली की मौत को आत्महत्या मानने की कहानी पर संशय जताया। रावत ने कहा कि मामले की गहन जांच होनी चाहिए।
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20 साल से बदनामी झेलता आ रहा सुरेन्द्र कोली का परिवार, बरी होने पर भी नहीं बदला लोगों का नजरिया - surendra kolis family faces stigma after his death in haridwar
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